देहरादून। देशभर के केमिस्टों द्वारा 20 मई 2026 को प्रस्तावित एक दिवसीय बंद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) और उत्तराखंड औषधि व्यवसायी महासंघ ने ऑनलाइन दवा बिक्री, कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा भारी डिस्काउंट और नकली दवाओं के विरोध में यह बंद बुलाया है। संगठन का दावा है कि यह आंदोलन केवल व्यापार नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।

महासंघ के अनुसार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिना उचित जांच के दवाओं की बिक्री हो रही है, जिससे एंटीबायोटिक और नशीली दवाओं के दुरुपयोग का खतरा बढ़ रहा है। संगठन का कहना है कि AI के जरिए फर्जी पर्चियां तैयार कर दवाएं मंगाई जा रही हैं और कई मामलों में नकली डॉक्टरों द्वारा ऑनलाइन परामर्श भी दिया जा रहा है।

केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि ऑनलाइन ऑर्डर में असली प्रिस्क्राइबर की पहचान तक स्पष्ट नहीं होती और कई बार एक ही पर्चे का बार-बार उपयोग कर दवाएं खरीदी जाती हैं। उनका कहना है कि इससे मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

यह भी पढ़ें:  मुख्यमंत्री धामी की पहल से पेंशनरों को बड़ी राहत, घर बैठे हो रहा डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट सत्यापन

AIOCD और महासंघ की प्रमुख मांगों में ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक, GSR 817 और कोविड काल में लागू GSR 220 को वापस लेना, कॉरपोरेट कंपनियों के भारी डिस्काउंट पर नियंत्रण और फार्मासिस्ट की पेशेवर भूमिका को सुरक्षित रखना शामिल है। संगठन ने कहा कि दवाएं कोई सामान्य वस्तु नहीं बल्कि जीवन से जुड़ी जरूरत हैं, इसलिए इनके वितरण में सख्त निगरानी जरूरी है।

महासंघ के नेताओं का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जा सकता है।

*खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तराखंड का पक्ष*

प्रस्तावित बंद को लेकर खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तराखंड ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि दवा व्यवसाय आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आता है और मेडिकल स्टोर बंद होने से आम जनता, विशेषकर गंभीर मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

यह भी पढ़ें:  एमडीडीए की बड़ी कार्रवाई अवैध निर्माणों पर चला प्रशासनिक बुलडोजर, कई व्यवसायिक भवन सील

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अपर आयुक्त द्वारा उत्तराखंड औषधि व्यवसायी महासंघ को भेजे गए पत्र में बंद के निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की गई है। विभाग ने कहा कि दवा विक्रेताओं द्वारा दी जाने वाली सेवाएं जनस्वास्थ्य हित में हैं, इसलिए उन्हें बाधित करना उचित नहीं होगा।

प्रशासन का कहना है कि अस्पतालों, बुजुर्ग मरीजों, आपातकालीन सेवाओं और नियमित दवा लेने वाले लोगों के लिए मेडिकल स्टोर बेहद जरूरी हैं। यदि एक दिन भी दवा उपलब्ध नहीं होती तो कई मरीजों की स्थिति गंभीर हो सकती है।

यह भी पढ़ें:  गहरी खाई में गिरे ट्रक चालक को SDRF ने किया रेस्क्यू, अंधेरे में चलाया सफल अभियान

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत आवश्यक सेवाओं में बाधा उत्पन्न होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति पर नजर बनाए रखें।

इधर आम जनता भी इस मुद्दे पर बंटी हुई दिखाई दे रही है। कुछ लोग केमिस्ट संगठनों की मांगों को सही ठहरा रहे हैं और ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियंत्रण की वकालत कर रहे हैं, जबकि कई लोगों का मानना है कि मरीजों की परेशानी को देखते हुए मेडिकल सेवाओं को बंद नहीं किया जाना चाहिए।

अब सबकी नजर 20 मई पर टिकी है कि सरकार और केमिस्ट संगठनों के बीच कोई समाधान निकलता है या फिर इस बंद का असर सीधे आम मरीजों पर पड़ेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *