• पहले कोटद्वार और अब देहरादून, हरिद्वार, रुड़की में बड़े पैमाने पर कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए कार्यकर्ता

देहरादून। कांग्रेस की राजनीति इस समय एक अजीब विरोधाभास से गुजर रही है। एक ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल लगातार सरकार को घेरने और माहौल बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी ही पार्टी के भीतर असंतोष इस कदर गहराता जा रहा है कि कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि खुलकर पार्टी छोड़ने लगे हैं। हालात यह हैं कि कांग्रेस के आरोपों से ज़्यादा चर्चा अब कांग्रेस से हो रहे इस्तीफों और भाजपा में हो रही ज्वाइनिंग की है। पहले कोटद्वार और अब देहरादून, ऋषिकेश, पौड़ी और रुड़की तक यह सिलसिला फैल चुका है, जो साफ संकेत देता है कि कांग्रेस का संगठनात्मक आधार लगातार कमजोर हो रहा है।

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देहरादून में पार्षद पूनम पुंडीर और देवकी नौटियाल के साथ डॉ. संजय सिंह, सौरभ चौधरी, सुरेंद्र सिंह, मोहन सिंह, सुरेश शर्मा, डॉ. पूजा राठौड़, डॉ. महेंद्र शर्मा, आर.के. बडोला, राजेश अरोड़ा और राजेंद्र हुड्डा ने कांग्रेस से दूरी बनाते हुए भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। ऋषिकेश से पार्षद मुस्कान, पूर्व मंडल अध्यक्ष उषा जोशी, पूर्व पार्षद सुंदरी कंडवाल, अभिनव पाल और शिवानी गोस्वामी भाजपा में शामिल हुए। पौड़ी जनपद में ब्लॉक प्रमुख अस्मिता नेगी के साथ ज्येष्ठ उप प्रमुख अर्चना तोपवाल, कनिष्ठ उप प्रमुख नीरज पटवाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य अजीत थपलियाल, सोहन पटवाल, मधु देवी, अनीता देवी, ममता देवी, अभिषेक कुमार और राजेश रावत ने कांग्रेस छोड़ भाजपा पर भरोसा जताया। वहीं रुड़की से सुबोध चौधरी, रविंदर भाटी, अजय मल्होत्रा, देवेंद्र सिंह, महेंद्र और सुमित खटाना सहित कई कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हुए।

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भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद पौड़ी की ब्लॉक प्रमुख अस्मिता नेगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हो रहे विकास कार्यों और स्पष्ट नीतियों से प्रभावित होकर उन्होंने यह निर्णय लिया है। उनका कहना था कि भाजपा में क्षेत्र के विकास को लेकर स्पष्ट सोच, कार्ययोजना और जनसेवा का अवसर दिखाई देता है, जबकि कांग्रेस में यह विश्वास धीरे-धीरे कमजोर होता गया।

कुल मिलाकर स्थिति यह है कि कांग्रेस सरकार को घेरने के प्रयासों में तो सक्रिय दिखाई देती है, लेकिन संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष और लगातार हो रहे पार्टी छोड़ने के मामलों पर उसका नेतृत्व असहज और मौन नजर आता है। गणेश गोदियाल के बयानों के समानांतर उनकी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं का भाजपा की ओर झुकाव यह दर्शाता है कि प्रदेश की राजनीति में भरोसे की धुरी तेजी से बदल रही है—और इसका सबसे बड़ा संकेत कांग्रेस के भीतर ही उभरता असंतोष है।

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