नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को साफ़ कर दिया कि उनका देश भारत को तेल, गैस और कोयला बिना किसी रुकावट के सप्लाई करता रहेगा। यह भरोसा ऐसे वक्त में आया है जब अमेरिका भारत पर रूस से तेल खरीद कम करने का दबाव बढ़ा रहा है। पुतिन ने एक आधिकारिक अनुवादक के जरिए कहा—“रूस भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा का भरोसेमंद सप्लायर है। हम बिना रुकावट फ्यूल भेजने के लिए तैयार हैं।”

अमेरिकी टैरिफ के साए में पुतिन का संदेश

याद दिला दें कि इसी साल अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल के मुद्दे को आधार बनाकर भारतीय सामानों पर 50% तक टैरिफ लगा दिया था। अमेरिकी दावा था कि यह रूसी राजस्व को युद्ध फंडिंग में जाने से रोकने की रणनीति है। ऐसे माहौल में पुतिन का बयान थोड़ा पुराने जमाने वाला दृढ़ भरोसा देता है—दोस्ती की डोर झंझावात में और कसने वाली।

यह भी पढ़ें:  युवा बताएंगे उत्तराखंड की राह, सरकार सुनेगी और उपयोगी विचारों को नीतियों से जोड़ेगी

कई सेक्टरों में नई साझेदारियां—फर्टिलाइजर से लेकर मैरीटाइम लॉजिस्टिक्स तक

भारत और रूस के बीच हुई बातचीत सिर्फ ऊर्जा पर नहीं रुकी। दोनों देशों ने फर्टिलाइजर, फूड सेफ्टी, शिपिंग और मैरीटाइम लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में कई अहम समझौते साइन किए।

सबसे उल्लेखनीय डील भारतीय कंपनियों और रूस की URALCHEM के बीच हुई, जिसके तहत रूस में यूरिया प्लांट स्थापित किया जाएगा। यह साझेदारी लंबे समय से चली आ रही इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन की परंपरा को और मजबूत करने वाली मानी जा रही है—जैसे खेत को लंबे समय तक सिंचाई मिलने का भरोसा।

यह भी पढ़ें:  देहरादून रोजगार मेले में 249 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित, अब तक 12 लाख से अधिक युवा लाभान्वित

ऊर्जा सहयोग और भू-राजनीतिक सवाल

पुतिन का यह कदम साफ़ संकेत है कि रूस भारत के साथ ऊर्जा संबंधों को अगले स्तर पर ले जाना चाहता है। सवाल मगर हवा में लटका ही है—क्या अमेरिका इस बढ़ते तालमेल को सहजता से देखेगा? और क्या भारत इन दोनों ध्रुवों के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ पाएगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *